Archive for ‘Yaad Shayari’

June 13, 2010

Yaad Shayari

ZINDAGI phool si muskurati rahe,
HAR khushi aapke daaman mein jagmagati rahe,
khuda se dua hai toh bas itni ke
kabhi-kabhi aapko humari yaad bhi aati rahe
May 12, 2010

Jab Hume Yaad Karna

Humaare Beech Badhti Tum Doori Nahi Samajh Sake,
Dillon Ko Door Karti Majboori Nahi Samajh Sake,
Khuda Ko Humne Yaad Kiya Us Vaqat,
Jab Hume Yaad Karna Tum Jaroori Nahi Samjhe
April 30, 2010

Har ghadi…

Har ghadi intzaar vich gujri
Usde baad usdi yaad vich gujri
Me ek phool han oh mainu rakh k bhul gayi
Meri sari umar usdi kitaaab vich gujri..
April 28, 2010

Fariyad kar k roye..

Uski baaton ko baar-2 yaad kar k roye,
Uske liye dar pe fariyad kar k roye,
Uski khushi k liye use chhod diya,
phir uski he kami ka ehsaas kar k roye.
March 16, 2010

मगर जब याद आएन्गी

कभी जो हम नहीं होंगे
कहो किस को बताओगे

वो अपनी उल्झने सारी
वो बेचैनि में डूबे पल्

वो आँखों में छुपे आन्शु
किसे फिर तुम दिखाओगे

बहुत बेचैन् होन्गे तुम
बहुत तनहा रह जाओगे

अभी भी तुम नहीं समझे
हमारी अनकही बातें

बहुत तुमको रुलाएन्गी

बहुत चाहोगे फिर भी तुम
हमे ना ढुन्ढ् पाओगे

कभी जो हम नहीं होंगे
कहो किस को बताओ

March 16, 2010

कभी दिल जला कभी जान भी

ज़रा ज़रा सि रनजिशे
कभी दिल जला कभी जान भी
कभी खो गई मुस्कान भी
मै अपनो के काबिल नही रहा
ये जानते है अन्जान भी
मेरे साथ अक्सर रहते है
कातिल मेरे मेहमान भी
धरती पर ज़ुलम देख कर
रूठा है आसमान भी
वो बदल गया खुदा सा जो
फ़रिस्ता था बना शैतान् भी
बस ज़रा ज़रा सि रनजिशे
ना भुला सका इन्सान् भी
March 16, 2010

दुन्ढ्ते हैं…!!

किताबो में मेरे फ़साने दुन्ढ्ते हैं
नादान् हैं गुज़्ररे ज़माने दुन्ढ्ते हैं

जब वो थे….!! तलाश-ए-ज़िंदगी भी थी
अब तो मौत् के ठिकाने दुन्ढ्ते हैं..!!

कल खुद ही अपनी म्हफ़िल् से निकाला था..!!
आज हुए से दिवाने दुन्ढ्ते हैं…!!

मुसाफ़िर् बे-खबर हैं तेरी आँखों से
तेरे शहर मे मएखाने दुन्ढ्ते हैं

तुझे क्या पता ए सितम् ढाने वाले
हम तो रोने के बहाने दुन्ढ्ते हैं…!!

उनकी आँखों का यु देखो ना “कमाल”
नये तीर् हैं…!! निशाने दुन्ढ्ते हैं..!!

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